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सूरज से गुफ्तगू #3

 

तू बना ले बहाने जितने बना सकता है
दूर चला जा जितना जा सकता है,
दूरिया जितनी भी बना ले हमारे बीच में
मै आउंगी तुजसे मिलने फिर भी वक्त  से वक्त  चुरा के.

 

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सूरज से गुफ्तगू #2

सूरज से गुफ्तगू #1

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सूरज से गुफ्तगू #2

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आज फिर छुप गया था वो मुझसे
न जाने कम्बखत कितनी कहानिया छुपा रहा था मुझसे.

कुछ और शिकायते सूरज से : सूरज से गुफ्तगू #1

सूरज से गुफ्तगू #1

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तुम रोज जो छुप-छुप के
मुझे यु देखा करते हो,
सिर्फ नफरत ही है ज़ेहन में
या थोड़ी मोहब्बत भी किया करते हो?

PS: I refrain to translate them in English! I don’t think I can justify it!

भटकन

रुका हु कुछ देर
पलक झपकते ही उड़ जाऊंगा,
कटे नहीं है पंख मेरे,
बस एक सीमा  के  बाद
मै भी तो थक जाऊंगा;
थोड़ी मोहल्लत दे दे,
फिर मुस्कराता भटक जाऊंगा.

आईने!

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खुश रहने में और खुश दिखने में
अगर फर्क न होता
तो मेरे घर क आईने
इतनी कहानिया न छुपाते.

I am sorry, for translated it will just not mean anything to me and so I leave it just as it is.

 

Half Moon!

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न जाने क्यों,

मुझे उस ढलती शाम के

अधूरे चाँद से अलग ही प्यार है.

*

Somehow,

I brace a different kind of love for that half moon,

advancing the evening.

 

PS:I know I could have never come up with an English translation, sounding almost the same as the Hindi version; still worth a try may be?