सूरज से गुफ्तगू #37

तुमसे ज्यादा आज कलवो उड़ते पंछी पसंद आते हैपर मुझे छोड़वो भी तुम्हारे पास चले आते हैकुछ तो होगा तुजमेजो किसी और में नहीं दीखताये सारा का सारा संसारक्यों तुजसे ही है खिलता Read More: सूरज से गुफ्तगू #36

सूरज से गुफ्तगू #35

सब कुछ हो के अब कुछ नहीं रहाहमारे दरमियान अब कुछ न रहातू आना मुझसे मिलने अगर चाहे तोक्युकी मेरे पास अब तुजसे मिलने का कोई बहाना न रहा Read More: सूरज से गुफ्तगू #34

सूरज से गुफ्तगू #30

जो देखना चाहता है तो देख लेता हैवरना न जाने कहा छुप जाता हैमै इंतज़ार करती हूँ की तू अब आएगापर तुजे न जाने मुझे यु परेशां देख, क्या चैन आता है. Read More: सूरज से गुफ्तगू #29

सूरज से गुफ्तगू #28

बिन मांगी जलन हैएक तूफ़ान, एक सैलाब भी हैरोज तुजसे पूछना चाहती हु, पर भूल जाती हूँतू है तो सही पर इतना दूर दूर क्यों हैं Read More: सूरज से गुफ्तगू #27

सूरज से गुफ्तगू #27

न देखु तुजेतो ज़िंदा ही रहती हूँन देखु तुजेतो वफ़ात से न मिल पति हूँन देखु तुजेतो उन गैरो में भी तुजे ही ढूंढ़ती हूँन देखु तुजेतो बस गुमसुम सी रहती हूँन देखु तुजेतो शोर में भी ख़ामोशी ढूंढ़ती हूँअब क्या बताऊ न देखु तुजेतो किसी बात का गम नहीं होतापर जो न देखु तुजेतोContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #27”

सूरज से गुफ्तगू #26

अब दूर दूर बैठ कर बातें नहीं होंगीअब तो मुलाकाते होंगीअब बेज़ुबान रात नहीं होंगीअब तो सन्नाटो में भी शरारत होगीबहुत रो ली मेरी आँखे तेरे बगैरबहुत तोड़ लिया अपना दिल, तूने मेरे बगैरतनहा न तू होगा न अब मैंशायद इसलिए, ए सूरज, आया है अब अपना समयअब सिर्फ आँखों आँखों में बातें नहीं होंगीधीरेContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #26”