Dear Neel #5

Dearest Neel, I almost forgot to write you a letter this month. Almost. Because see I made it a point to write before the month ends, before the year ends, before 2021 bids adieu, before the two’s welcome us. I have long given up on writing to you on the 15th of every month, IContinue reading “Dear Neel #5”

सूरज से गुफ्तगू #50

न नगमे न सपनेन तेरा न मेराचल बीच राह ही कही मिलते हैजी जान से नहीं बस उन ढाई हर्फो को निभाते हैमुश्किल सही नामुमकिन तो नहींहसना और रोना भी पर तेरा साथ तो सहीअब कोई कहानी तेरी छुपी नहींमेरे पंख अब मोम के नहींन अब कोई इंतज़ार है, न सितारों को पाने की चाहतहैContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #50”

सूरज से गुफ्तगू #47

सुना है मिलने वाले ख्वाबो में भी मिल जाते हैतुम भी आते हो मिलनेधीमे धीमे ख्वाबो को सजोनेभीनी ज़ुल्फो की चादर तलेआँखों से नींद चुराएपर जैसे ही तुम्हारा हाथ थामुतो न जाने कहा गायब हो जाते होमानो जैसे ख्वाबो में ही मोहब्बत करते होसुना है मिलने वाले ख्वाबो में भी मिल आते हैकभी उन ख्वाबोContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #47”

सूरज से गुफ्तगू #44

तेरे जाने के साथ आज मै सोने चली जाउंगीबिस्तर पर लेट कर एक अलग ही धुन में खो जाउंगीउसी उल्जन के साथ सो जाउंगीकी शायद ख्वाबो में कुछ सुलझ जायेक्या पता जो न सोचा हो वो भी मिल जाये Read More: सूरज से गुफ्तगू #43

सूरज से गुफ्तगू #42

तुम बार बार जो अपनी चलाते थेन जाने मुझे कितने हिस्सों में तोड़ जाते थेअब जो तुम पिघले हो अर्सो के बादउम्र भर का हिसाब चुकाना होगा तुम्हे आजतोड़ने की ख्वाहिश नहीं रखते हमबस बाटना चाहते है तेरे गमअब तक तुजे छूने से ही डरती थीअब तुम मुझे खोने से डरोगेअब तक सिर्फ तुम्हे दूरContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #42”

सूरज से गुफ्तगू #26

अब दूर दूर बैठ कर बातें नहीं होंगीअब तो मुलाकाते होंगीअब बेज़ुबान रात नहीं होंगीअब तो सन्नाटो में भी शरारत होगीबहुत रो ली मेरी आँखे तेरे बगैरबहुत तोड़ लिया अपना दिल, तूने मेरे बगैरतनहा न तू होगा न अब मैंशायद इसलिए, ए सूरज, आया है अब अपना समयअब सिर्फ आँखों आँखों में बातें नहीं होंगीधीरेContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #26”

सूरज से गुफ्तगू #23

इशारो इशारो में बात बहुत कर लीबिना कहे मेरी हर ख्वाहिश पूरी कर दी,फिर भी कहता है कुछ मांगू तुजसेपर अब कुछ मांगूंगी तो तुजे खो दूंगी शायद खोने के दर से। https://aestheticmiradh.com/2020/10/21/सूरज-से-गुफ्तगू-22/

सूरज से गुफ्तगू #20

तेरे आने का वक़्त हो गया है पर जो सपनो में तू ही है उसका क्या करू, तू ही बता तेरे साथ, सपनो में या खुदसे दूर असलियत में, किसे चुन। Read more: सूरज से गुफ्तगू #19

Her Mysterious Meshuga.

Hey folks, I hope you all are doing fine. I know I have been away for a long time, but I promise I’ll be back as soon as I can. Till then I am very pleased to share another poem of mine that has been published at Spillwords, a place where words matter. I sent themContinue reading “Her Mysterious Meshuga.”

Illusion or Authenticity!

I dreamt I dreamt of beautiful things I dreamt with open eyes. All my life I was taught To dream big Fly high And so with open eyes I dreamt of open skies. Of peace, calm And of little love. I have dreamt of inane faith And believed That everything will find its way. Oh-Continue reading “Illusion or Authenticity!”