Why We Need Feminism in 2021 #8

Feelings and emotions are neutral and no human should have to hide them. Even today the society uses the term #manup so callously that it leaves a negative impact on people. No one should have to hide them needlessly. Read More: Why We Need Feminism in 2021#7

सूरज से गुफ्तगू #39

उसने कहा हम मिले नहींफिर जुदाई का गम कैसेउसे क्या पता, हम मिले नहींफिर भी मोहब्बत थी उससेपाया तो नहींपर अब तक ढूंढ रही हूँउस एक तिनके सी मुलाकातअब तक महसूस कर रही हूँबादलो और फूलो पर चल कर नहींकांटो और अंगारो से भी लड़ कर आयी हूँवो सारी पुरानी बातेंइन सन्नाटो में छुपा करContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #39”

सूरज से गुफ्तगू #37

तुमसे ज्यादा आज कलवो उड़ते पंछी पसंद आते हैपर मुझे छोड़वो भी तुम्हारे पास चले आते हैकुछ तो होगा तुजमेजो किसी और में नहीं दीखताये सारा का सारा संसारक्यों तुजसे ही है खिलता Read More: सूरज से गुफ्तगू #36

सूरज से गुफ्तगू #28

बिन मांगी जलन हैएक तूफ़ान, एक सैलाब भी हैरोज तुजसे पूछना चाहती हु, पर भूल जाती हूँतू है तो सही पर इतना दूर दूर क्यों हैं Read More: सूरज से गुफ्तगू #27

An Ode To 2020

Women, wrong; Men, wrong Blame patriarchy A trend set fake feminism. Truths hidden, sources misused Toxicity left, an only muse. Wander, wander around if you will Find, find the source if you will Failure, an only accomplice. Poverty and texture in coarse rumblings Death_ No food A trickle of water? Lost families Lost homes WhereContinue reading “An Ode To 2020”

सूरज से गुफ्तगू #13

कभी कभी जब अकेले रोती हूँ तो रातो को भी तेरा इंतज़ार करती हूँ कभी कभी, जब अकेले में सोती हूँ तो खुद की उंगलियों से यु सिलवटे तेरी बना जाती हूँ तेरे बाहों में सिमटना चाहती हूँ कुछ देर ही सही, तुजसे दिल का हर राज़ कहना चाहती हूँ. तू समझता नहीं मेरी प्यासContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #13”

सूरज से गुफ्तगू #10

दिल तो मशवरे नहीं करता मुझसे क्या तू भी अब नहीं करेगा गम रास आने लगा था मुझे क्या तू भी अब ग़मज़ादा हो जायेगा? कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #9

A Weekday Musings!

You don’t like mornings, especially early mornings and then you have to wake up one fine weekday as early as 4:00 and your groggy-self hates everything. You drag yourself off the bed, get dressed and open your eyes only to the whiff of coffee. 1 sip and you are okay, 2ndsip and you think you’llContinue reading “A Weekday Musings!”

आईने!

  खुश रहने में और खुश दिखने में अगर फर्क न होता तो मेरे घर क आईने इतनी कहानिया न छुपाते. I am sorry, for translated it will just not mean anything to me and so I leave it just as it is.