Tag Archives: hindi writings

सूरज से गुफ्तगू #3

 

तू बना ले बहाने जितने बना सकता है
दूर चला जा जितना जा सकता है,
दूरिया जितनी भी बना ले हमारे बीच में
मै आउंगी तुजसे मिलने फिर भी वक्त  से वक्त  चुरा के.

 

More गुफ्तगू   with that sun below:

सूरज से गुफ्तगू #2

सूरज से गुफ्तगू #1

Advertisements

सूरज से गुफ्तगू #1

20190531_184715.jpg

तुम रोज जो छुप-छुप के
मुझे यु देखा करते हो,
सिर्फ नफरत ही है ज़ेहन में
या थोड़ी मोहब्बत भी किया करते हो?

PS: I refrain to translate them in English! I don’t think I can justify it!

भटकन

रुका हु कुछ देर
पलक झपकते ही उड़ जाऊंगा,
कटे नहीं है पंख मेरे,
बस एक सीमा  के  बाद
मै भी तो थक जाऊंगा;
थोड़ी मोहल्लत दे दे,
फिर मुस्कराता भटक जाऊंगा.