सूरज से गुफ्तगू #20

तेरे आने का वक़्त हो गया है पर जो सपनो में तू ही है उसका क्या करू, तू ही बता तेरे साथ, सपनो में या खुदसे दूर असलियत में, किसे चुन। Read more: सूरज से गुफ्तगू #19

सूरज से गुफ्तगू #19

तुम एक ख्वाब होतुम से मिलने की एक अनकही चाहत है,कब तक नज़्मों में बाते करू तुमसेकब तक वो किताबो वाला इश्क़ करू तुमसे?अब है तेरी बारी, मुक्कम्मल कर मेरे ख्वाबचाहे फिर क्यों न करनी पड़े जंग तुजे उसे रब से ही आज। Read More: सूरज से गुफ्तगू #18 PS: If anyone remembers, I have aContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #19”

सूरज से गुफ्तगू #18

कई दिनों से तुजसे मुलाकात नहीं हुई हैं ये भीगी बारिश से जैसे नफरत सी हुई हैं, तू ही कहता था, तेरे बिना मेरा अस्तित्व नहीं तो अब ये तू ही बता, तेरे बिना मैं खोकली बन_ पर जिउ तो सही? Read more: सूरज से गुफ्तगू #17

सूरज से गुफ्तगू #17

सुन आज कोई बात नहीं करते हैं तेरे फिर से डूब जाने की बात नहीं करते हैं, तेरे, हर शाम के बाद वह बदलते हुए चाँद के पास जाने की बात नहीं करते हैं तुजे यु किसी से बाटने की बात नहीं करते हैं, हमारे कभी न मिल पाने की बात नहीं करते हैं सुनContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #17”

सूरज से गुफ्तगू #16

तुम कहते नहीं पर मुझपे मरते ज़रूर होतुम थकते नहीं पर मुझे ख्वाबो में देखने को थोड़ी देर सोते जरूर हो,तुम्हारे होठों पे सजी इबादत में, मैं हूँतुम्हारे सीने में छिपी वो सुकून की चाह में, मैं हूँ,तुम कहते नहीं पर रातो से नफरत तुम्हे भी हैंतुम कहते नहीं यार, पर मेरी वो हर अनकहीContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #16”