सूरज से गुफ्तगू #48

मुद्दतो बाद एक पैगाम आया हैभरी दोपहर में मेरे चाहने वाले का ऐलान आया हैडर है कही वो फिर न मुकर जायेइतनी दफा छोड़ गया, वैसे कही फिर न छोड़ जाये. Read More: सूरज से गुफ्तगू #47

सूरज से गुफ्तगू #46

अभी तो दिखा था तू फिर छुप गयामोहब्बत है मुझसे कह कर फिर चला गयाअब तक इतनी चाय पिलाई है, आज तू भी एक घूट पीलानशा तो तुजपे भी चढ़ गया है, अब तो ये शर्म हटा Read More: सूरज से गुफ्तगू #45 PS: Merry Christmas everyone.

सूरज से गुफ्तगू #43

तू सोचता होगा की तूने सिर्फ मुझे सताया हैपर तूने मुझे खुद से ज़्यादा जलाया हैंतू सोचता होगा की तूने सिर्फ अपनी दास्तान रौशन की हैंपर तूने हर कोशिश के साथ मेरे हौसले को उड़ने की आहट दी हैं Read More: सूरज से गुफ्तगू #42