Tête-à-tête: The Tumultuous Lives and Loves of Simone de Beauvoir and Jean-Paul Sartre by Hazel Rowley

“So much the better—this was death. It was nothing; it was to cease to breathe. It was happiness, it was perfect happiness. They had now what they had always wanted to have, the union which had been impossible while they lived. Unconscious whether he thought the words or spoke them aloud, he said, “No twoContinue reading “Tête-à-tête: The Tumultuous Lives and Loves of Simone de Beauvoir and Jean-Paul Sartre by Hazel Rowley”

Why We Need Feminism in 2021 #29

https://www.instagram.com/reel/CL6liEMg49I/?igshid=zya2xghjc6h6 That’s not me that’s Princess Consuela Banana Hammock. She pleads pardon for mismatched song and unpracticed footwork but she kind of got excited seeing Vicky Kaushal’s charms. Day 29 of #whyweneedfeminismin2021 Read More: “Why We Need Feminism in 2021 #28 – Aesthetic Miradh” https://aestheticmiradh.com/2021/03/01/why-we-need-feminism-in-2021-28/

Why We Need Feminism in 2021 #4

Day 4 of #whyweneedfeminismin2021 Kindergarten taught me what good meant, so over time when someone asked me if I was a good girl, I took the term for granted and accepted the adjective. I was a good girl. Meaning, I thought good meant loyal, kind, helping, compassionate, humble. Someone who would stick to their valuesContinue reading “Why We Need Feminism in 2021 #4”

One Breath AT A Time

Trying to find my balance in an absolutely imbalanced world. I can’t see it but there has to be, has to to be some thin thread of hope that I can cling to, hold on to. Untill that thin reality flows in, let the universe spin, but I will stand on my values, the oneContinue reading “One Breath AT A Time”

सूरज से गुफ्तगू #50

न नगमे न सपनेन तेरा न मेराचल बीच राह ही कही मिलते हैजी जान से नहीं बस उन ढाई हर्फो को निभाते हैमुश्किल सही नामुमकिन तो नहींहसना और रोना भी पर तेरा साथ तो सहीअब कोई कहानी तेरी छुपी नहींमेरे पंख अब मोम के नहींन अब कोई इंतज़ार है, न सितारों को पाने की चाहतहैContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #50”

सूरज से गुफ्तगू #49

प्यार और इश्क़ में फर्क समाज आयातेरे और मेरे बीच का फर्क आज समाज आयादिन और रात सा अंतर है हमारे दर्मियापर देख फिर भी अब तक का कारवां क्या खूब निभाया हैइस बार तू छोड़ के नहीं गयाअब यकीन है इस बार नहीं जायेगासांज और सवेरे से पहले का साथ तू खूब निभाएगा ReadContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #49”

सूरज से गुफ्तगू #48

मुद्दतो बाद एक पैगाम आया हैभरी दोपहर में मेरे चाहने वाले का ऐलान आया हैडर है कही वो फिर न मुकर जायेइतनी दफा छोड़ गया, वैसे कही फिर न छोड़ जाये. Read More: सूरज से गुफ्तगू #47

सूरज से गुफ्तगू #45

तू अपनी आँखों पे थोड़ी तवज्जोह तो रखकही न लग जाये तुजे मेरी ही लतजैसे मै तुजे नहीं बाट सकतीवैसे तू भी मुझे न बाट पाएकही तुजे भी न हो जाये ऐसी ही मोहब्बत Read More: सूरज से गुफ्तगू #44

सूरज से गुफ्तगू #44

तेरे जाने के साथ आज मै सोने चली जाउंगीबिस्तर पर लेट कर एक अलग ही धुन में खो जाउंगीउसी उल्जन के साथ सो जाउंगीकी शायद ख्वाबो में कुछ सुलझ जायेक्या पता जो न सोचा हो वो भी मिल जाये Read More: सूरज से गुफ्तगू #43

सूरज से गुफ्तगू #43

तू सोचता होगा की तूने सिर्फ मुझे सताया हैपर तूने मुझे खुद से ज़्यादा जलाया हैंतू सोचता होगा की तूने सिर्फ अपनी दास्तान रौशन की हैंपर तूने हर कोशिश के साथ मेरे हौसले को उड़ने की आहट दी हैं Read More: सूरज से गुफ्तगू #42