सूरज से गुफ्तगू #15

एक नयी उम्र मांग के लायी हूँ मैं वापिसएक और सांज तेरे साथ गुज़ारने आयी थी मैं हाफ़िज़,कुछ चंद आरज़ू में निकल गएकुछ तेरे इंतज़ार में,रेहम थोड़ी कर- तेरे जाने के बाद कल तू फिर चला आएगामैं चल गयी तो मेरा खोया वक़्त फिर कहा आएगा। Read more: सूरज से गुफ्तगू #14