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सूरज से गुफ्तगू #12

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तू ढूंढ रहा है कुछ
ऐसा सुना है मैंने
तू खो चूका है कुछ
ऐसा पता लगा है मुझे.
अधूरा अधूरा सा लग रहा होगा न
जैसे मुझे अब तक लगता था
आज तक तूने कहा था
चल आज मै तुजसे वही बात कहती हूँ
नहीं पायेगा मुझे
जब तक मिश्री सा घुल नहीं जाता तू मुजमे
नहीं खोज पायेगा मुझे
जब तक नहीं खो जाता तू, मुजमे.

कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #11

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सूरज से गुफ्तगू #5

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बिखेर दिए है आज जो बदल भी तुमने
बस गए हो यु उसके भी दिल में
कुछ तो शर्म करो कितनो के दिल के तोड़ोगे
अब बस भी करो, मोहब्बत करता हु, ये कितनो से कहोगे.

थोड़ी और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #4

सूरज से गुफ्तगू #2

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आज फिर छुप गया था वो मुझसे
न जाने कम्बखत कितनी कहानिया छुपा रहा था मुझसे.

कुछ और शिकायते सूरज से : सूरज से गुफ्तगू #1

Nature’s Beauty.

Wherein in every part of the world, it is already hot and the temperature is soaring, my city is running it’s weather guide on it’s own accord.

It is almost raining here every single day, the sun is scorching down on us only for a couple of hours during the day, and then it is again a picturesque place to be in.

So, it is honestly, wonderful to wake up to a day like this-

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