Dear Neel #3

Dear Neel #3 Dearest Neel, what kind of a year is this? Didn’t it simply sail through? Can you believe it is already September which is flying by us while I laze around writing letters to you? Nine months of a year gone by and what have I done? Half the year I have eitherContinue reading “Dear Neel #3”

Dear Neel #2

Dear Neel #2 Did you get my letter? Did you read it? Did you think about me as you saw my handwriting? Did you miss me?  The last time I wrote to you was when I had a writer’s block or when I thought I had a writer’s block. That was the day when IContinue reading “Dear Neel #2”

सूरज से गुफ्तगू #11

सुन, तू कब से काबिल हो गया यु गम छुपाने में तू कब से यु हिचकिचाने लगा खुल के मुस्कराने में कोई पुरानी छूटी हुई ख़ुशी याद आयी है या बस मुझसे दूर जाने की रुस्वाई है? कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #10

सूरज से गुफ्तगू #10

दिल तो मशवरे नहीं करता मुझसे क्या तू भी अब नहीं करेगा गम रास आने लगा था मुझे क्या तू भी अब ग़मज़ादा हो जायेगा? कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #9

सूरज से गुफ्तगू #9

सुनो थोड़ा ठहर जाओ तुमसे एक बात केहनी थी, वो बस सुनते जाओ दिल आज फिर भर आया है मै, रात तुम्हारे आने के इंतज़ार में काट लुंगी तुम बस शाम सहारा बनते जाओ, सुनो, बस थोड़ा ठहर जाओ.   कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू#8