सूरज से गुफ्तगू #16

तुम कहते नहीं पर मुझपे मरते ज़रूर होतुम थकते नहीं पर मुझे ख्वाबो में देखने को थोड़ी देर सोते जरूर हो,तुम्हारे होठों पे सजी इबादत में, मैं हूँतुम्हारे सीने में छिपी वो सुकून की चाह में, मैं हूँ,तुम कहते नहीं पर रातो से नफरत तुम्हे भी हैंतुम कहते नहीं यार, पर मेरी वो हर अनकहीContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #16”