सूरज से गुफ्तगू #13

कभी कभी जब अकेले रोती हूँ तो रातो को भी तेरा इंतज़ार करती हूँ कभी कभी, जब अकेले में सोती हूँ तो खुद की उंगलियों से यु सिलवटे तेरी बना जाती हूँ तेरे बाहों में सिमटना चाहती हूँ कुछ देर ही सही, तुजसे दिल का हर राज़ कहना चाहती हूँ. तू समझता नहीं मेरी प्यासContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #13”

सूरज से गुफ्तगू #12

तू ढूंढ रहा है कुछ ऐसा सुना है मैंने तू खो चूका है कुछ ऐसा पता लगा है मुझे. अधूरा अधूरा सा लग रहा होगा न जैसे मुझे अब तक लगता था आज तक तूने कहा था चल आज मै तुजसे वही बात कहती हूँ नहीं पायेगा मुझे जब तक मिश्री सा घुल नहीं जाताContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #12”

सूरज से गुफ्तगू #10

दिल तो मशवरे नहीं करता मुझसे क्या तू भी अब नहीं करेगा गम रास आने लगा था मुझे क्या तू भी अब ग़मज़ादा हो जायेगा? कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू #9

सूरज से गुफ्तगू #9

सुनो थोड़ा ठहर जाओ तुमसे एक बात केहनी थी, वो बस सुनते जाओ दिल आज फिर भर आया है मै, रात तुम्हारे आने के इंतज़ार में काट लुंगी तुम बस शाम सहारा बनते जाओ, सुनो, बस थोड़ा ठहर जाओ.   कुछ और गुफ्तगू: सूरज से गुफ्तगू#8

सूरज से गुफ्तगू #7

क्या यार तुम आज फिर चुप गये देखो ये रोज रोज का रूठना मनाना नहीं चलेगा तुम्हारा रोज यु हमसे दूर जाना नहीं चलेगा. हमने तो कभी कहा नहीं की हमे बारसात पसंद है हमे तो तुम्हारी वो दूर से भेजी रंगीन आहट ही पसंद है हमने कब कहा की हमे वो पेड़ से टूटContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #7”

Illusion or Authenticity!

I dreamt I dreamt of beautiful things I dreamt with open eyes. All my life I was taught To dream big Fly high And so with open eyes I dreamt of open skies. Of peace, calm And of little love. I have dreamt of inane faith And believed That everything will find its way. Oh-Continue reading “Illusion or Authenticity!”

11:11 Dilemma Prevails!

A few days ago I was incessantly ranting about 11:11, what it is, whether to believe in it or not and so on. But now I have many other reasons to worry. A while ago, only 11:11 bothered me with its repeated appearing but now there are a whole set of numbers bothering me.  Continue reading “11:11 Dilemma Prevails!”


Now this 11:11 thing is an ever-increasing belief that I have come across recently. So what exactly is this 11:11? I had no idea, I still don’t but I am going to write about it all the same. So what I have heard/read/or come across about his numerological belief is that it is a goodContinue reading “11:11”

An Unwilling Bouzouki

Sitting on chairs in proper alignment It seems a long ago, when we students were huddled about, Celebrating India’s independence was the days’ requirement Making our English teacher proud.   Constantly, we had chided and pleased To do something else as a substitute to teach, We did it often, played adventures Making memories after memoriesContinue reading “An Unwilling Bouzouki”


I wonder how people exactly multi task so much. Oh, don’t get me wrong; I am not talking about simple things like walking and texting, or eating and watching TV. I have bigger issues today. There are people who do millions of things together and yet seem never to get tired.   I know someContinue reading “Superhuman.”