सूरज से गुफ्तगू #26

अब दूर दूर बैठ कर बातें नहीं होंगीअब तो मुलाकाते होंगीअब बेज़ुबान रात नहीं होंगीअब तो सन्नाटो में भी शरारत होगीबहुत रो ली मेरी आँखे तेरे बगैरबहुत तोड़ लिया अपना दिल, तूने मेरे बगैरतनहा न तू होगा न अब मैंशायद इसलिए, ए सूरज, आया है अब अपना समयअब सिर्फ आँखों आँखों में बातें नहीं होंगीधीरेContinue reading “सूरज से गुफ्तगू #26”